Friday, October 12, 2007

India Of My Dreams


कक्षा 6 में मुझसे पहली बार मेरा पूरा नाम पूछा गया ,उस समय से लेकर आज तक बहुत से लोगों ने बहुत बार मुझसे मेरा पूरा नाम पूछा। मै आप से अपेक्षा करता हूँ कि भारत में पूरे नाम का मतलब क्या होता है ।मै आने वाले समय में ऐसे भारतीय समाज की परिकल्पना करता हूँ जब नामों से 'जाति' की विभक्ति हट जाये । चौहान ,गुर्जर ,अवस्थी ,द्विवेदी हो या फिर खान ,इकबाल या मसूद ..............मैने आम पहचान के लिए सामाजिक वर्गीकरण के इस ढांचे और स्वरूप में झांकने की सम्पूर्ण कोशिश की परंतु अफसोस .....ये घटने के स्थान पर और बढता जा रहा है।मै कल्पना करता हूँ ऐसे भारत की जिसमें पर्याप्त संसाधन हो और उनका समुचित प्रयोग किसी भी वर्ग विशेष को पिछडा या अनुसूचित न रहने दे ।


मुद्रा स्फीति की दर ,आर्थिक सूचकांक ,खेलों में भारत ,विश्व पटल पर मजबूत भारतीय होना तब तक गर्वाभुनूति नहीं करा पाते जब तक सामाजिक कुरीतियां इस समाज में व्याप्त है ।एक बार एक जर्मन अधिकारी नें बात करते हुए मुझसे Dowry का मतलब पूछा ,और लड़कियों को जला कर मारने का कारण । शायद हम में से किसी भारतीय के पास इसका जबाब न हो लेकिन इन्हे बदलने का जज्बा अवश्य है ।


मेरी पीढी नें बदलते हुए भारत को देखा है ,और साथ में बदलती हुई सोच को भी।एक ओर मेरे गांव में आज हुक्का पीने का चलन खत्म हो गया तो दूसरी ओर होली पर सभी जाति के लोगों को गले लगाने का प्रारम्भ भी हुआ है ।प्रधान एक ऐसी महिला है जो अपने निर्णय स्वयं लेती है ।मुझे प्राथमिक विद्यालयों में लड़कियों के अनुपात देखकर खुशी होती है जो आज से 10 वर्ष पूर्व नगण्य थी ।खुशी है कि लोगों के जीवन यापन का स्तर भी बढ गया है।


मैने RTO और तहसील के आफिसों के बाहर अक्सर कई दलालों को घूमते हुए देखा है ।भीड़ भाड़ से ये लोग अक्सर रेलवे स्टेशन के कुलियों की तरह नजर आते हैं ।मै आने वाले समय में इस प्रकार के आम आफिसों को IT Enabled एवं Single Window System या सुविधा खिडकी के रूप में देखना चाहता हूँ ।


कुल मिलाकर मै एक नैतिक रूप से मजबूत राष्ट्र की परिकल्पना करता हूँ ।मै सबसे अधिक भ्रष्ट राष्ट्र से निकलकर सबसे उन्नतशील राष्ट्र का सपना देखता हूँ । ये एक सुबह का सपना है जिसको सच होना ही है ।आइये हम सब देश के आम नागरिक अखबारों और स्तम्भों की दुनिया से निकलकर मजबूत राष्ट्र की नींव रखें ।


पवन कुमार

अधिकारी, भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन




  • The India of my dreams is a better place for women. Where not only can we walk on streets without being ogled at, commented upon and harassed, but girl babies are given a chance to live, study and be proud of being women.
  • The India of my dreams has good roads connecting even the remotest villages, from Kashmir to Kanyakumari, from Nagaland to Gujrat.
  • The India of my dreams is corruption free and I don't have to worry about bribing the babus just to get my letters delivered properly.
  • The India of my dreams is not divided by state, religion, caste etc.
  • And last but not the least, the India of my dreams is led by Leaders, Real leaders who work towards making India a nation to reckon with.
Shweta
(Computer Professional, Infosys)



MERE SAPNO KA भारत JAHAN
  • garibi na ho
  • prasasan sahayogi ho
  • gram sahar ka bhed na ho
  • twarit nyaya mile
  • saman siksha ho
  • bhartiyata ke saath-saath ham aadhunik bhi ho
  • bhartia yogyta ki srestha samjhi jay
  • yojnaye jarooratmandoo tak pahuche
  • bhartia sirf apne ko bhartia samjhe.
---दर्शन



Kya Duniya main kisi bhi desh ke logo ne apne desh ko badla hai ?
NAHI. aaj tak kisi desh ke nagrikon ne apne desh ko nahi badla hai.
Desh ke nagriko ne apne aap ko badla hai.
Naye sapne dekhe hai
Un sapno ko sach kiya hai.
Desh ko apne aap se bada samjha hai.
Desh ko nahi badla, khud ko badla
To apne aap ko badlo, Bharat ko nahi.
Apne aap ko kaise badalna hai ye sabse bade sawal hai ?
Hum kaise badlen ki bharat bhi japan ke barabar main khada ho.
Hamari Nitiyan kya ho ?
Hum unhe implement kaise karen ?
Ye sabse bada sawal hai.
Bhart ko chahiya ek
Rajeev Gandhi
Abraham Lincon
Joseph Stalin
Sridharan
APJ कलम

- दीपक िबष्‍ट


1 comment:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बस मैं इतना ही कहना चाहूंगा, ये बातें सच हो जाएं।